कांकड़

गांव-गुवाड़ की बातें

वी‍थी

छाया चित्र जो टुरते-फिरते ले लिए गए. आशा है आप कापी नहीं करेंगे, करें तो श्रेय देना न भूलें.
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फागुन से ठीक पहले माघ या माह के महीने में घर-खेत में होना अल्‍हदा अनुभव है. गूंगे के गुड़ जैसा! यही वह मौसम है जब उम्‍मीदों की परियां खेतों में नाचती हैं और हवाओं में सपनीली हीर सुनाई देती है. उत्‍तर भारत विशेषकर थार में यह खेतों के जवां होने के दिन हैं. फसलों की मस्‍ती किसानों की आंखों में तिरती दिखती है. होली से पहले उड़ते गुलाल की खुश्‍बू सहज ही महसूस किया जा सकता है. कुछ रंग चित्रों की जुबानी..

गेहूं के हरियाले खेत

 

मावठ से भीगी थार की एक सड़क

 

सफेद फूलों से लकदक सोगरा

 

भीगे भीगे से चने के खेत

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बाजरे के हरे भरे खेत..
पौ का महीना, धुंध धंवर और कड़कड़ाती सर्दी में दुबकते से पखेरू
चलो नहर आने तक और काम ही निपटा लिया जाए; मूंग की कुटाई क्‍रता किसान.
छुट्टियां - थार में एक स्‍कूल भवन
कुप्‍प में तूड़ी बची है तो ज्‍यादा चिंता की बात नहीं

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जिंदगी रिचार्ज के लिए भी कोई कूपन है.

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रोजी रोटी का जुगाड़ सपेरों को शहर में खींच लाता है.

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पत्‍थरों की भाषा.

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फोटो जेठ की तपती दुपहरी का है जब बाप-बेटा खेत से लौट रहे थे.

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लंबा सफर हम दोनों साथी .

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मेह और उसके कुछ रंग..
चलो बरसने लगा और काम खत्‍म, घर चलें. अमरपुरा राठान के पास घर लौटती महिलाएं.
रंगमहल रंगमहल के ऐतिहासिक का ऐतिहासिक धोरा और अस्‍तांचल को जाते सूर्य.
सूरतगढ़ कृषि फार्म में पानी पर लहराती हवा.
अबोहर के पास किन्‍नू का एक बाग.. हरा ही हरा.

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जीवन का अनुभव लिए एक पीढ़ी

पारंपरिक चूल्‍हा

चूंदड़, चुंदड़, चूनरी.. रंग रंगीली..

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थार में कुछ इस तरह ही कटता है सफर..

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पहाडी, हरियाली, बंदर, स्‍टेच्‍यू और एक सड़क..

जयपुर के पास दिल्‍ली सीकर बाइपास पर बिलौची गांव की एक पहाड़ी से लिया गया  चित्र. हरियाली, मानों किसी ने दोनों हाथों से उंडेल दी हो.
जयपुर के पास दिल्‍ली सीकर बाइपास पर बिलौची गांव की एक पहाड़ी से लिया गया चित्र. हरियाली, मानों किसी ने दोनों हाथों से उंडेल दी हो.
घर की सीढियों पर दो उत्‍पाती बंदर.
घर की सीढियों पर दो उत्‍पाती बंदर.
लूनकरणसर (lunkaransar) में पत्‍थरों की सडक बनाते मजदूर.
लूनकरणसर (lunkaransar) में पत्‍थरों की सडक बनाते मजदूर.
जयपुर का स्‍टेच्‍यू सर्किल  (statue circle jaipur)
जयपुर का स्‍टेच्‍यू सर्किल (statue circle jaipur)
बीकानेर. सादुल सिंह संग्राहलय के बाहर लालगढ़ पैलेस के दालान में विचरता मोर.
बीकानेर. सादुल सिंह संग्राहलय के बाहर लालगढ़ पैलेस के दालान में विचरता मोर.

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बीकानेर. पर्यटन और सीखने की दृष्टि से मेरे पसंदीदा राजस्‍थानी शहरों में से एक. एक जीवंत शहर जो आज भी अपनी अनेक परंपराओं और रिवाजों के लिए जाना जाता है. कुछ यात्राओं के बाद किसी भी शहर की गलियां जानी पहचानी हो जाती हैं और फिर वहां घूमना आनंद नहीं देता. पता नहीं क्‍यों बीकानेर को देखकर ऐसा नहीं लगता. कुछ छायाचित्र इस ऐतिहासिक शहर के जीवन से ..

जूनागढ़ पैलेस के कर्ण परोळ के पास अटालिका और उसमें सुस्‍ताता कबूतर.
जूनागढ़ पैलेस के कर्ण परोळ के पास अटालिका और उसमें सुस्‍ताता कबूतर.
जूनागढ पैलेस. किसी समय रियासत का प्रमुख केंद्र रहा यह राजमहल फिल्‍म वालों का पसंदीदा स्‍थल बना.
जूनागढ पैलेस. किसी समय रियासत का प्रमुख केंद्र रहा यह राजमहल फिल्‍म वालों का पसंदीदा स्‍थल बना.
चलो मेहनत करें.. सुबह सुबह बीकानेर कलेक्‍ट्रेट के बाहर सफाई करती एक कर्मचारी.
चलो मेहनत करें.. सुबह सुबह बीकानेर कलेक्‍ट्रेट के बाहर सफाई करती एक कर्मचारी.
बीकानेर. लालगढ़ रेलवे स्‍टेशन के पास सरकारी गोदाम और कबूतरों के झुंड.
बीकानेर. लालगढ़ रेलवे स्‍टेशन के पास सरकारी गोदाम और कबूतरों के झुंड.
बीकानेर. सादुलसिंह चौक पर बैठे ढोळी.
बीकानेर. सादुलसिंह चौक पर बैठे ढोळी.

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यात्रा के दौरान विभिन्‍न जगहों से गुजरना होता है.. इसी दौरान कुछ तस्‍वीरें ऐसे ही ले ली जाती हैं..

गंगानगर, राजस्‍थान का भगत सिंह चौक.
गंगानगर, राजस्‍थान का भगत सिंह चौक.
महाजन, राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 15 पर बीकानेर जाते हुए.
महाजन, राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 15 पर बीकानेर जाते हुए.
पीलीबंगा-कालीबंगा के बीच पुल से घग्‍घर नदी का एक दृश्‍य.
पीलीबंगा-कालीबंगा के बीच पुल से घग्‍घर नदी का एक दृश्‍य.
कोटगेट बीकानेर.. शहर के सबसे प्राचीन स्‍थलों में से एक.
कोटगेट बीकानेर.. शहर के सबसे प्राचीन स्‍थलों में से एक.

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कंप्‍यूटर में हजारों हजार रंग होते हैं और जीवन में शायद करोड़ों.. रंगों के उसी समुद्र से कुछ बूंदें हम वीथी के इस प्रयास में पेश करते रहे हैं. एक और कोशिश कांकड़ की..

ढलती शाम .. छाया भी लंबी हो चली है और चारपाइयों पर आराम करने वाले लोग शायद किसी और काम में व्‍यस्‍त हो गए. कुछ जूठे बर्तन इधर उधर पड़े सुस्‍ता रहे हैं.
ढलती शाम .. छाया भी लंबी हो चली है और चारपाइयों पर आराम करने वाले लोग शायद किसी और काम में व्‍यस्‍त हो गए. कुछ जूठे बर्तन इधर उधर पड़े सुस्‍ता रहे हैं.
खेजड़ी मंदिर के पास से सूरतगढ़ को देखने की कोशिश .. बस एक श्‍वान बीच में आ गया.
खेजड़ी मंदिर के पास से सूरतगढ़ को देखने की कोशिश .. बस एक श्‍वान बीच में आ गया.
घग्‍घर नदी और ढलती हुई शाम .
घग्‍घर नदी और ढलती हुई शाम .

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इस रविवार को मोतीबाग में एक सरकारी स्‍कूल जाना हुआ. दूसरी मंजिल की बालकनी से नीचे झांका तो देखा कि एक कबूतरी बैठी अंडों को से रही है. पक्षियों के प्रजनन का दौर है यह . सूरतगढ़ में घर की छत पर खड़ी साइकिल पर एक कमेड़ी ने घोंसला बना लिया है. चूनावढ़ में एक अंकल के घर की छत में चिडी का घोंसला है. गांव में लगभग हर घर में एकाध घोंसला तो मिल ही जाएगा. वैशाख, ज्‍येष्‍ठ के दिनों में, मेह पानी शुरू होने से पहले अनेक पक्षी प्रजनन की प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं. उत्‍तरी भारत में यह अजीब सा लगता है क्‍योंकि यह ऐसा समय है जब गर्मी अपने चरम पर होती है. खैर यही सचाई है और यही प्रकृति है, इस बार फोटो गैलरी में कुछ ऐसे ही फोटो…

छत पर रखी साइकिल के करियर पर ही घोंसला बना लिया इस कमेडी ने..
छत पर रखी साइकिल के करियर पर ही घोंसला बना लिया इस कमेडी ने..
घोंसला और अंडे .. हर दिन कुछ न कुछ रख दिया जाता खाने के लिए .
घोंसला और अंडे .. हर दिन कुछ न कुछ रख दिया जाता खाने के लिए .
कच्‍चे मकान की छत की गाडर में चिडी का घोंसला ...
कच्‍चे मकान की छत की गाडर में चिडी का घोंसला ...
अपने घोंसले के आसपास अनजान को देखते ही सतर्क हो जाती है यह मां..
अपने घोंसले के आसपास अनजान को देखते ही सतर्क हो जाती है यह मां..
घोंसले का एक रूप यह भी ..
घोंसले का एक रूप यह भी ..
एक पेड़ की कोटर सी में बना एक घोंसला    (फोटो- पुष्‍पेंद्र, रिडमलसर)
एक पेड़ की कोटर सी में बना एक घोंसला (फोटो- पुष्‍पेंद्र, रिडमलसर)

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खुदाइयों के बाद हमें खंडहर, टूटे हुए मृदभांड तो मिल जाते हैं पर टूटे हुए दिल नहीं. यह अलग बात है कि सभ्‍यताओं और इतिहास के बारे में हमारी अधिकतर जानकारी इसी तरह की खुदाइयों पर आधारित है. हरियाणा के फरमाणा गांव में भी इन दिनों इसी तरह की एक खुदाई चल रही है. बताया जाता है कि खुदाई में मिला स्‍थल हड़प्‍पाकालीन है. तीन साल से इस खुदाई की अगुवाई डेक्कन कॉलेज के पुरातत्वविद् वसंत शिंदे कर रहे हैं. यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि इसी तरह के अवशेष उत्‍तरी पश्चिम थार में बहुतायत में मिलते है. रंगमहल और कालीबंगा या आगे, सरस्‍वती के बाण में फैला हुआ इलाका. इतिहास की किताबें हरियाणा के इस‍ इलाके को थार के उत्‍तर पश्चिम से अनेक नदियों और जंगलों के माध्‍यम से जोड़ती हैं. बीबीसी हिंदी के पत्रकार सुशील झा पिछले दिनों फरमाणा गए. उनके लिए गए चित्र साभार इस बार वी‍थी में …

इतिहास के साथ जुडा वर्तमान और भविष्‍य : खुदाई स्‍थल पर कार्यरत दो महिलाएं .
इतिहास के साथ जुडा वर्तमान और भविष्‍य : खुदाई स्‍थल पर कार्यरत दो महिलाएं .
सीधे सडकें और नब्‍बे डिग्री के मोड , इस खुदाई स्‍थल को मोहन जो दडो से जोडते हैं.
सीधे सडकें और नब्‍बे डिग्री के मोड , इस खुदाई स्‍थल को मोहन जो दडो से जोडते हैं.
पुरात्‍त्‍वविद् शिंदे कहते हैं कि यहां मिला घर और सामान हड़प्पाकालीन अन्य सामानों जैसा है। मुहरें, आभूषण, जेवर और घरों की आकृत्तियाँ हड़प्पा जैसी हैं, इसलिए इसमें कोई शक नहीं है कि यह हड़प्पाकालीन स्थल.
पुरात्‍त्‍वविद् शिंदे कहते हैं कि यहां मिला घर और सामान हड़प्पाकालीन अन्य सामानों जैसा है। मुहरें, आभूषण, जेवर और घरों की आकृत्तियाँ हड़प्पा जैसी हैं, इसलिए इसमें कोई शक नहीं है कि यह हड़प्पाकालीन स्थल.

(बीबीसी से साभार पूरा आलेख यहां देखें – http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2009/03/090331_farmana_harappa_skj.shtml)

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प्रकृति
के रंग हजार …

इस चैत की आखिरी रात, पूर्णिमा को चमकता चांद. वैशाख शुरू हो रहा है. (9-10 अप्रैल रात)
इस चैत की आखिरी रात, पूर्णिमा को चमकता चांद. वैशाख शुरू हो रहा है. (9-10 अप्रैल रात)
उतरता चैत और दिल्‍ली के आसमान पर बादल..
उतरता चैत और दिल्‍ली के आसमान पर बादल..
बीकानेर के पास अर्जनसर पेट्रोल पंप पर खिला गेंदा.
बीकानेर के पास अर्जनसर पेट्रोल पंप पर खिला गेंदा.
सूरतगढ़ के पास... दिन निकलता हुआ...
सूरतगढ़ के पास... दिन निकलता हुआ...

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picture-240stnरास्‍ते हमेशा रस्‍ते रहते हैं, मंजिल नहीं बन पाते. मंजिल तक पहुंचने का माध्‍यम भर बने रहते हैं. कमोबेश यही स्थिति उनके यानी रास्‍तों या सड़कों के किनारे लगे सूचक पत्‍थरों की है. आम यात्री का इनसे प्राय: कोई लेना-देना नहीं होता. उन्‍हें अपनी मंजिल, अपना गंतव्‍य पता होता है. पता होता कि किस बस अड्डे पर उतरना है. नए बच्‍चों व नए यात्रियों की जिज्ञासा अलग तरह की होती है. उन्‍हें हर एक या पांच किलोमीटर पर इस तरह के पट्टों का इंतजार रहता है. जीपीआरएस प्रौद्योगिकी आ रही है. उसके बाद इन ‘मील के पत्‍थरों’ की प्रासंगिकता और कम होगी. उत्‍तर पश्चिमी राजस्‍थान में घूमते हुए कई रोचक सूचक पत्‍थरों को देखा. यह फोटो फीचर इन्‍हीं पर आधारित…

नाम कुछ भी हो, दिशा और दूरी तो पता चलेगी ही.
नाम कुछ भी हो, दिशा और दूरी तो पता चलेगी ही.
80 मील यानी माइल एटी. थार की भगीरथी, इंदिरागांधी नहर इसी जगह मूल हेड से अस्‍सी मील पूरे करती है और इसी कारण इस जगह का नाम पड़ा है माइल एटी.
80 मील यानी माइल एटी. थार की भगीरथी, इंदिरागांधी नहर इसी जगह मूल हेड से अस्‍सी मील पूरे करती है और इसी कारण इस जगह का नाम पड़ा है माइल एटी.
चक, ढाणी हो या गांव, कस्‍बा, शहर ये सूचक किसी से भेद नहीं करते.
चक, ढाणी हो या गांव, कस्‍बा, शहर ये सूचक किसी से भेद नहीं करते.

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पलायन, थार के जीवन की एक विडंबना है, खासियत है. लोग बसते रहते हैं, पलायन करते रहते हैं. इसके कई कारण हैं, अच्‍छे जीवन यापन या रोजगार की तलाश, पशुओं के लिए अच्‍छे हरा-चारा या कुछ और लेकिन पलायन होता रहता है. यही कारण है कि थार के हर किसी गांव में एक आध बंद या उजाड घर मिल जाएगा पलायन की कहानी कहता हुआ. यह थार के ग्राम्‍य जीवन का शाश्‍वत सत्‍य है. थार या राजस्‍थान के गांवों में पलायन की इसी कथा को बांचने के लिए इस बार की यह फोटो फीचर……

छत्‍तरगढ के पास इंदिरागांधी नहर के दायीं ओर बसे खारबारा गांव में खंडहर. इस गांव के अनेक परिवार अब खेतों में ढाणी में रहने लगे हैं.
छत्‍तरगढ के पास इंदिरागांधी नहर के दायीं ओर बसे खारबारा गांव में खंडहर. इस गांव के अनेक परिवार अब खेतों में ढाणी में रहने लगे हैं. घर खंडहर हो रहे हैं.
कभी घर रहा होगा यह कमरा. पिछली गर्मियों में वीरान मिला.
कभी घर रहा होगा यह कमरा. पिछली गर्मियों में वीरान मिला.
बीरमाना गांव में यह घर अब भेड बकरियों या आवारा पशुओं का आशियाना है.
बीरमाना गांव में यह घर अब भेड बकरियों या आवारा पशुओं का आशियाना है.
खुदाइयों में बहुत कुछ मिल जाता है, टूटे हुईं ईंटे, मृदभांड या कुछ और.. नहीं मिलता तो टूटा हुआ दिल और अरमान.हर पलायन के साथ कुछ न कुछ छूटता और टूटता है.
खुदाइयों में बहुत कुछ मिल जाता है, टूटे हुईं ईंटे, मृदभांड या कुछ और.. नहीं मिलता तो टूटा हुआ दिल जो हर पलायन के साथ टूटता है.

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रिड़मलसर के पास बारानी �ूमि या धोरों पर एक खेत में बनी झोंपड़ी. हम लोग मा (माघ) की ढलती शाम में वन्‍यजीवों पर एक शोध रपट के लिए घूम रहे थे.
रिड़मलसर के पास बारानी भूमि या धोरों पर एक खेत में बनी झोंपड़ी. हम लोग मा (माघ) की ढलती शाम में वन्‍यजीवों पर एक शोध रपट के लिए घूम रहे थे.
ये दोनों चरवाहे �ाई, हमें उस वक्‍त मिल गए जब हम लखासर गांव जा रहे थे अक्‍तूबर 08 में. वे कहते हैं कि हर साल उन्‍हें रेवड़ के साथ मीलों मील सफर करना पड़ता है.
ये दोनों चरवाहे भाई, हमें उस वक्‍त मिल गए जब हम लखासर गांव जा रहे थे अक्‍तूबर 08 में. वे कहते हैं कि हर साल उन्‍हें रेवड़ के साथ मीलों मील सफर करना पड़ता है.
राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 15 पर कैंचियां के पास एक खेत में खेजड़ी. थार में सबसे पवित्र माने जाने वाले दरख्‍तों में से एक. थार की कठिन जलवायु में �ी पलने फूलने वाला दरख्‍त.
राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 15 पर कैंचियां के पास एक खेत में खेजड़ी. थार में सबसे पवित्र माने जाने वाले दरख्‍तों में से एक. थार की कठिन जलवायु में भी पलने फूलने वाला दरख्‍त.
थार के एक गांव बीरमाना में एक घर की बाखळ में सुबह शाम ढेर सारे कबूतर बैठे रहते हैं. जमीन से लेकर आसपास की �ींतों और लकडि़यों पर �ी. यह दिसंबर 08 के अंतिम दिनों में ढलती शाम का समय है. (कैमरा Nikon Coolpix)
थार के एक गांव बीरमाना में एक घर की बाखळ में सुबह शाम ढेर सारे कबूतर बैठे रहते हैं. जमीन से लेकर आसपास की भींतों और लकडि़यों पर भी. यह दिसंबर 08 के अंतिम दिनों में ढलती शाम का समय है. (कैमरा Nikon Coolpix)

51 thoughts on “वी‍थी

  1. Excellent my dear friend. Pictures tells the whole story. I think ” PALAYAN KA DARD DESH KA HAR GAON JHEL RAHA HAI”.

    Bahut acha prayas hai…..LAGE RAHO.

  2. hello. prithvi ji…

    फोटो फीचर bhut aach laga..
    photograph me subject ko bhut ache
    se filimaya gya ha….
    aase lagta ha hum vha per phuch gay ho.

    – dinesh, SGNR

  3. Prithvi Sir,
    very nice effort on the lifestyle of desert. it’s the real picture of dunes very different from RTDC’s website…these are the true colors…pics are really very nice…

    congratulation and best wishes….
    raman. delhi

  4. Dear Prithviji,
    all of us profess Journalism but very few like you make a sincere attempt at making this journey as rewarding and fruitful as you are doing. Keep up the good job.
    Rgds
    PRAVEEN DUTTA

  5. बहुत कम लोग होते हैं जो अपनी मिट्टी
    , गुवाड़, पोखर और बरगद के पेड़ को याद रखते हैं.. आपका ये लगाव मुझे बहुत अच्‍छा लगा ..

  6. ख़ुद में तहज़ीब समेटे ये भोले लोग,
    दिल को किताब बनाके जीते हैं
    वाह पृथ्वी, तुम अपने नाम के कितने अनुकूल हो।
    अख़लाक़

  7. Really its searching so nice . but every person know that sand of bikaner sale every where bcz its like an gold in the earth AND Sweets like Rasgolla , bhujia atfer that from sand .

    RAJESH SARASWAT
    BIKANERI
    (Jai Trigun Swami )

  8. पृथ्‍वी जी,
    मुझे कुछ फोटो व वीडियो भेजने हैं.. इसका क्‍या तरीका हो सकता है.
    – b.p .joshi

  9. वाह राजस्‍थान इसी तरह के रंगों से भरा है.. कुछ और रंग मेरे ब्‍लाग पर भी देख सकते हैं ..

  10. वाह प्रिथ्वी जी……” कभी कुछ सुन भी लेते हैं…कभी कुछ कह भी देते हैं…ये पत्थर खंडहरों वाले…किसी के घर का हिस्सा हैं….”

  11. जीवन को देखने का आपका नजरिया अच्छा लगा. यह तस्वीरें उसे बड़ी ही बारीकी से उसे बयां करती है. राजस्थान का जीवन जैसे आपने यहाँ उड़ेल ही दिया हो. इतनी खुसुरत तस्वीरों को शेयर करने केलिए शुक्रिया, पृथ्वी जी.

  12. Dear Prithvi,

    when visiting photo gallary i felt that in our village life we have such rich traditions that can be exposed before the world. Your idea making all villager like me feel proud. it is commendable.
    keep it on, we are all with you…………..

  13. बेहद ही सुन्दर चित्रों से सुसज्जित, आम सी दिखने वाली पर बहुत ही दिलजस्प ..

    वह लाजवाब

  14. फ़ोटूडा़ भोत जोरगा है !
    कद म्हाखर खींच लिया ?
    जीव सोरो होग्यो !
    बधायजै !
    करियां राखो कीं न कीं खेब्बी !

  15. वाह प्रिथ्वी जी……

    वह लाजवाब राजस्थान का जीवन जैसे आपने यहाँ उड़ेल ही दिया हो.
    ये पत्थर खंडहरों वाले…किसी के घर का हिस्सा हैं….
    इतनी खुसुरत तस्वीरों को शेयर करने केलिए”
    शुक्रिया,

  16. aapka paryas srahniy hai mujhe laga es blog ko dekhkar auor path kar lga es duniya me kuchh log aaj bhi dharti se jude huai hai. mujhe asha hai kee kabhi mouka mila to aapke paryas me kuchh shyog de paugan.

  17. kya parthvi maja aa gaya. main gujarat ke surat city me rahta hoi. main pilibanaga ka rahna wala . aapki is karti ko padkar gaam ki yaad taja ho gayi.
    iske liye aapko thankyou .

  18. आन्नद आ गयो सा प्र्वासी भारतीयो के लिये एक अच्छा प्रयास है

कुछ तो कहिए..

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