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बाहर वाले कमरे में दरवाजे के नीचे से खिसकाए गए अखबारों को ढेर लगा है। हर बार की तरह। कई दिन के बाद घर में घुसते ही पहला काम होता है इन अखबारों को समेट कर रास्ता बनाना। अखबार समेटते समेटते ही एक खबर आंखों में अटक गई। सिंगापुर डब्ल्यूटीए के युगल में हार के साथ ही मार्तिना हिंगिस ने टेनिस को अलविदा कहा। ओह! कार्तिक उतर रहा है और सिर्फ टेनिस खेलने के लिए ही जन्मी, इस दौर की सबसे ‘इंटेलीजेंट’ टेनिस खिलाड़ी रैकेट खूंटी पर टांग रही है। मार्तिना हिंगिस के नहीं होने से टेनिस कोर्टों की चमक या चौंध पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन तमाम वर्जनाओं को रौंधने की उसकी जीवटता को हमेशा याद रखा जाएगा। भले ही वह टेनिस के महानतम खिलाड़ियों की सूची में शामिल होने से एक दो कदम चूक गई हो।
 

हमारे लिए मार्तिना एकमात्र ऐसी एथलीट रही जिसके जन्म लेने से पहले ही तय हो गया था कि वह टेनिस खेलेगी। मार्तिना हिंगिस की मां और टेनिस खिलाड़ी मेलेनी, दिग्गज मार्तिना नवरातो​लिवा की धुर प्रशंसक थी। मार्तिना हिंगिस जब गर्भ में थी तभी उसका मार्तिना नाम व खेल टेनिस तय हो गया। ​शायद इसी तैयारी और मां के सपनों ने मार्तिना का प्रारब्ध लिख दिया। उसे टेनिस में होना था, वह टेनिस में हुई .. टेनिसमय हुई। उसमें न तो अन्ना कोरनिकोवा जैसे ग्लैमर था न ही वह सेरेना और वीनस विलियम्स जैसी ताकत वाली थी। अपनी पांच फुट सात ईंच के कद व साधारण काठी के बावजूद मार्तिना ने टेनिस में अपनी सफलता के झंडे ही नहीं गाड़े 15-16 साल की साल में तो वह इस खेल की राजकुमारी हो गई।

बाइस साल की उम्र में, ऐसी उम्र में जबकि ज्यादातर खिलाड़ी रैकेट के भार को आंकना शुरू करते हैं मार्तिना ने चार ग्रेंड स्लेम जीत के साथ पहली बार मैदान से हटने की घोषणा की। अपने रिटायरमेंट से खेल जगत को सकते में डाल दिया। तब ऐसा लगा कि यूरोप के खेले खाये समाज की, जीत-जीत कर अघा गई नवयुवती अपनी मां की आकांक्षाओं व खेल की अपेक्षाओं का बोझ उतार फेंकना चाहती है। जीतना जैसे उसके बांये हाथ का खेल हो गया था। वह चाहती थी कि अपने गांव लौट जाए, घुड़सवारी करे और पढ़ाई पूरी करे। लेकिन उसकी नाड़ तो टेनिस से बंधी थी इसलिए उसे लौटना तो यहीं था। रिश्तों में आई कड़वड़ाहट को पीती, टू​टी यारियों के जख्मों को ढंकती मार्तिना कोर्ट पर लौट आई और अगले 11-12 साल टेनिस को जीती, जीतती चली गई। बीच में एक रिटायरमेंट के साथ वह पांच साल तक टेनिस मैदान से दूर रही। लेकिन जब भी लौटी और अधिक परिपक्वता व प्रतिबद्धता के साथ।

 

मार्तिना के करियर को याद करते हुए मोनिका सेलेस, मेरी पियर्स, जस्टिन हेनिन हार्डिन, लिंडसे डेवनपोर्ट व जेनिफर केप्रियाती जैसी अनेक दिग्गज टेनिस खिलाड़ी के नाम आते हैं। लेकिन मार्तिना इन सबमें किसी न किसी रूप अलग रही। कदकाठी या शारीरिक सौष्टव में भले ही वह अपनी समकक्ष खिलाड़ियों से 19 रही लेकिन टेनिस की बारीकियों, खेलते समय टाइमिंग में उसका कोई सानी नहीं रहा। होता भी कैसे टेनिस उसके डीएनए में जो समाया था जो उसे कोर्ट पर खींच कर लाता रहा। आलोचकों ने जब जब उसे खारिज करने की कोशिश की वह कहीं मजबूत होकर कोर्ट पर लौटी। 
 
मेरे लिए मार्तिना ऐसी एथलीट रही जिसने जीत कर हार की कद्र की, हर हार को मुस्कराते हुए गले लगाया और टेनिस और अपने प्रशसंकों को शुक्रिया कहा। शायद यही कारण है कि सोलह साल की उम्र में तीन ग्रेंड स्लैम जीतने वाली मार्तिना आज 37 साल की उम्र में युगल में दुनिया में नंबर वन होते हुए रिटायर हो रही है। एक बार बिना किसी शिकवे शिकायत के, टेनिस को शुक्रिया कहते हुए। टेनिस के चाहने वालों की ओर से एक शुक्रिया तो हमारा भी बनता है मार्तिना। ये खेल तुम्हें मिस करेगा!
(Photo Curtsy net)