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रोमानिया में जन्में माइकल क्रेतु ने एनिग्मा के गाने ‘बियांड द इनविजिबल’ को ब्रिटेन के एक जंगल में फिल्माया जहां आइस रिंक की बर्फ को जमाने में सात दिन लगे. इस गाने में लातवियन और जार्जियन गीतों के बोल हैं और इसका वीडियो फिनलैंड के एक आइस डांस युगल पर फिल्माया गया है. काले धन को लेकर जारी उबाऊ जुबानी जमाखर्च से उकताकर जब बालकनी में आया तो हवाओं के सिस्टम पर यह प्ले हो रहा था. कि अदृश्य की सीमाओं से परे किसी को कुछ छुपाना नहीं होता. कुछ भावों की वास्तविकता बंद आंखों से ही महसूस की जा सकती है.

सामने मानीटर के ठीक नीचे रखे पूजा गर्ग सिंह के कविता संग्रह को देखते हुए क्रेतु और उनके इस गाने का दर्शन बरबस याद आ जाता है. पन्नों पर की गई नोटिंग को पढता हूं तो लगता है कि क्रेतु और उनका दर्शन कितना मेल खाता है. क्योंकि ​कविता केवल शब्दों को विषय की किसी एक लड़ी में पिरो देना ही नहीं होता बल्कि वह कवि के दर्शन और सोच को लेकर भी आगे बढ़ती है. पूजा गर्ग सिंह की कविताएं कुछ ऐसी ही हैं. वे विषय की गहराइयों, उंचाइयों व विस्तार की कसौटी पर खरी उतरती हैं कि उनकी कविताओं में गिरती हुई बर्फ, उगता हुआ सूरज और ढलती हुई रातें हैं. वे मचलती लहरों व जलते हुए खेतों की बात करती हैं. उनकी कविताओं में दुनिया जहान का वह समसा‍मयिक विषय है जो एक कवि का विचलित करता है.

पूजा गर्ग सिंह अपने हिस्से की सर्दियों और हमारे गर्मी के मौसमों की बात करते हुए  अपनी हर व्यक्तिगत खुशी और दुख को इस व्यापक प्रकृति से जोड़कर देखती हैं. यही उनकी कविताओं को विशिष्ट बनाता है.

उनके शब्दों में कहूं तो तुम्हारे आसमान पर टंगा चांद मेरा वह सिक्का है जो मैं हर शुक्ल पक्ष में अंधेरों की बावड़ी में फेंकता हूं और जो फिर नहीं मिलता. या कि मेरे लिए रात का मतलब तुम्हारा घर आना है और मेरी रात कई दिनों से नहीं हुई है. कि बर्फ कुछ भी नहीं तुम्हारी यादों पर बिछी झूठ की सफेद मोटी चादर के सिवा. उनकी कविताओं में मुहब्बत किसी सुनसान राह पर झर गए पीले पत्‍तों सी है जिन्हें वक्त अल सुबह बुहारता है.

कि पूजा की कविताएं सिर्फ शब्दों का ताना बना नहीं है बल्कि अपने आप में एक दर्शन है. वे यूं ही छोटी छोटी बातों में बड़े सवाल उठा देती हैं कि क्यूं कुछ नदियों की मंजिल इक दरिया में जाकर खत्म हो जाती है और सीख देती हैं कि सभी दूरियों को नापने के लिए अंतरिक्ष के पैमानों की जरूरत नहीं होती. वे कहती हैं…

And let moments fall in my lap

like a poet’s  words

So full of themselves

And yet so empty!


 

[अमेरिका में रह रहीं पूजा गर्ग सिंह का कविता संग्रह ‘एवरीडे एंड सम अदर डेज’ आथर्सप्रेस ने प्रकाशित किया है. आनलाइन आर्डर यहां किया जा सकता है.]