एक प्यारी सी लड़की थी जिसने पता नहीं कितने सपनों को अपने शरीर पर गोदनों के रूप में गुदवा लिया. जिंदगी को अपनी शर्तों पर जिया और दुनिया को ठेंगे पर रखा. अपने अंतिम दिनों में डायरियों के पुराने पन्नों में खो चुके दोस्तों को ढूंढा और उनसे सालों साल बाद बात की. और ऐसे ही सावन में एक दिन अपनी जिंदगी का मोबाइल स्विच आफ कर दिया. राबिन विलियम्स का जाना एमी जैसे कितने प्यारे लोगों की याद दिला देता है जिन्होंने अपने हिस्से के आसमान की लड़ाई में जमीन से नाता तोड़ लिया.

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एमी, इक हारी हुई बाजी 

सावन में इतने स्‍तब्‍ध करने वाले समाचार नहीं आते, नहीं आने चाहिए. एमी वाइनहाऊस के चले जाने की खबर, कुछ ऐसा ही समाचार था. भले ही इन कुछ वर्षों में एमी ने कोई याद रखने वाला नया तराना नहीं गाया लेकिन अपनी शुरुआत से उसने उम्‍मीदों के जो क्षितिज बुने थे वहां सुरों की सतरंगी सफल कहानियां थी, अच्‍छे संगीत के सपने थे,इक भरोसा था कि वह फिर किसी दिन अपने बिंदास रूप में चौंकाने वाले गानों के साथ स्टेज पर होगी. पर एमी अपनी मौत से इन सब आशाओं पर हताश करने वाला तारकोल पोत कर चली गई. 27 साल की उम्र में, चंद यादगार नग्‍में हमारी झोली में डालकर.

एमी के टैक्सी चालक पिता को जैज से बहुत लगाव रहा और वे गाहे बगाहे कुछ गुनगुनाते रहते थे. शायद पिता का संगीत से प्रेम एमी की नसों में लहू बनकर दौड़ने लगा और उसकी नाड़ संगीत से बंध गई. दस साल की थी तो अपने दोस्त  के साथ मिलकर रैप ग्रुप ‘स्वीट एन सोर’ बनाया. जैज से प्रभावित पहले एलबम फ्रेंक के साथ संगीत में औपचारिक रूप से उतरी. इसके गानों के लिए उसे इवोर नोवेलो गीतकार अवार्ड मिला, ब्रिट अवार्ड में नामांकन हुआ तथा इस एलबम को मर्करी म्यूजिक प्राइज के लिए भी छांट लिया गया. 2006 में बेक टु ब्लैक आया और धूम मच गई. ब्रिटेन से लेकर अमेरिका तक में. पांच ग्रेमी अवार्ड मिले और स्टारडम, शौहरत उसके कदमों में लोटने लगी.

बस इतनी सी बात है मित्रो, बाकी तो कहानियां किस्से हैं एक जन्मजात संगी‍त प्रतिभा के तबाह होने की. प्रेम में टूटती, टूटते रिश्तों से बिखरती एक युवती जो अपने हिस्से के आसमान की लड़ाई में जमीन से नाता तोड़ देती है. एमी ने शुरू में एक बार कहा था कि वह शौहरत पाने के लिए नहीं आई है, वह तो बस एक संगीतकार है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. शौहरत और व्यक्तिगत जीवन के किस्सों में उसका संगीत बहुत पीछे छूट गया और उसकी प्रतिभा भी. प्रेम के नशे का तोड़ उसने मरिजुआना, क्रेक में ढूंढना चाहा. ग्लानि में खुद के शरीर को चोटें पहुंचाईं और बीमारियों को दावत दी. अपनी कमजोरियों से लड़ती, सड़कों पर अर्द्धनग्न बदहवास घूमती एमी की तस्‍वीरें बाद के समय की दीवारों पर चस्पां होती रहीं.

इस तरह नशे, ड्रग्स  के कारण तबाह होने वाली एमी कोई पहली प्रतिभा नहीं है. संगीत से ही कई प्रतिभाशाली, संभावनाशील नाम इस सूची में हैं. जिम्मी हेंडरिक्स, जेनिस जोपलिन, कुर्त कोबेन तथा जिम मोरिसन को कैसे भूला जा सकता है. संभावनाओं के पौधों का इस तरह मुरझा जाना, अंदर से कुछ दरकाता है क्योंकि इन्हीं  छोटी छोटी प्रतिभाओं से बेहतर समय समाज की उम्मीदें निकलती हैं. तो एमी संगीत की हो या किसी और क्षेत्र की, एमी ब्रिटेन की हो या किसी और देश की, उसका यूं खुद को तबाह करना सालने वाला है.

लंदन की एक घटना याद आती है. मर्करी प्राइज समारोह हो रहा था और एमी को आना था लेकिन किसी को भरोसा नहीं था कि वह आएगी भी. अचानक किसी कोने से एमी दबे पांव स्टेनज पर आती है और पूरे हॉल में सन्नाटा पसर जाता है.. एमी के दिल में पता नहीं क्या होता है कि वह ‘प्यार इक हारी बाजी है’ (लव इज ए लूजिंग गेम) गाना शुरू करती है. सिर्फ एक अकूस्टिक गिटार के साथ. सुनने वाले बताते हैं कि एमी के गले से सुर नहीं मानों दर्द, पीड़ा की गहरी नदियां बह रहीं थीं. गाना पूरा हुआ तो एमी काफी देर तक संभलने की कोशिश करती रही और शुक्रिया जैसा कुछ बोलकर मंच से नीचे उतर गई. कितने कलाकार ऐसा समां बांध पाते हैं. एमी ने कर दिखाया क्योंकि दर्द और संगीत से उसका गहरा नाता रहा. उसकी आवाज में जो ताजगी, गहराई थी वह हर गले को नहीं मिलती. जैज, सॉल व आरएंडबी की यह प्यारी सी गायिका थी जिसने पता नहीं कितने सपनों को अपने शरीर पर गोदनों के रूप में गुदवा लिया. जिंदगी को अपनी शर्तों पर जिया और दुनिया को ठेंगे पर रखा. जो दिल में आया बोला, जो दिल में आया किया. अपने अंतिम दिनों में डायरियों के पुराने पन्नों में खो चुके दोस्तों को ढूंढा और उनसे सालों साल बाद बात की. और ऐसे ही एक दिन अपनी जिंदगी का मोबाइल स्विच आफ कर दिया.

अपने सिस्टम से इन दिनों उसका प्यार इक हारी बाजी सुनता हूं तो शब्द गडमगड होकर एमी एक हारी बाजी जैसे कुछ हो जाते हैं.

[एमी (1983—2011) को याद करते हुए यह आलेख कुछ साल पहले एक सावन में लिखा था.]

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