बाहर से आती चिड़ी की चहचहाट और रोशनी के बीच शरीर कहता है कि अब सो जाना चाहिए. सुबह के पांचेक बज रहे हैं. दिन निकल आया और रात सोने चली गई है. होंडूरस व इक्वाडोर का मैच चल रहा है जबकि कोस्टा रिका ने इटली को हराकर इंग्लैंड की इस प्रतियोगिता से रवानगी पक्की कर दी है. ग्रुप डी में से अगले दौर की 16 टीमों में स्थान बनाने वाली कोस्टा रिका पहली टीम है. इस ग्रुप की बाकी तीन टीमें, कभी न कभी विश्व कप विजेता रह चुकी हैं. पिछली बार के विश्व चैंपियन स्पेन की विदाई से तय हो गया है कि इस बार विजेता नया होगा. हालैंड और क्रोएशिया धमक से जीतकर आगे आए हैं. स्टीफन हाकिंग ने कहा है कि उनका दिल इंग्लैंड के साथ है पर वे बाजी ब्राजील पर लगाना चाहेंगे.

आखिर क्यों नहीं ब्राजील ही तो है जिसका नाम फुटबाल के नाम के बाद आता है. उसका पर्यायवाची है. फुटबाल मतलब ब्राजील, ब्राजील मतलब फुटबाल.

कहते हैं कि बेटियां जब घर आती हैं तो दीवारें मुस्कराने और दरवाजे गाने लगते हैं. साओ पाउलो से लेकर नेताल और रीयो डी जेनेरियो से लेकर सल्वाडोर तक ब्राजील की हर गली इन दिनों नाच रही है क्योंकि उसकी बेटी घर आई है. फुटबाल ब्राजील की बेटी है. उसकी लाडकंवर है. वह यहां की गलियों, नुक्कड़ों में खेल खेल कर बड़ी हुई है. संवरी है. माओं ने इसे अपने बेटों से ज्यादा लाड से पाला पोसा तो पिताओं ने तमाम वर्जनाओं को ताक पर रखकर इसे फलने फूलने का मौका दिया है. तभी तो दुनिया भर में जिसकी अपनी टीम नहीं होती वह ब्राजील के लिए हूटिंग करता है. पेले की महान विरासत को संजोए यह देश रोमारियो, रोनाल्डो, काका से लेकर नेमार और आस्कर की अल्ट्रा माडर्न पीढी तक आ गया लेकिन फुटबाल के लिए उसका लाड अब भी कम नहीं हुआ है. मैच किसी का भी हो स्टेडियम भरे रहतेे हैं. यूं ही नहीं ब्राजील को दुनिया का फुटबाल देश कहा जाता है और उसके 10000 से अधिक खिलाड़ी हर समय दुनिया के किसी न किसी कोने में फुटबाल खेल रहे होते हैं.

सयानों ने कहा है कि हमें धीरे धीरे चीजों की आदत जो जाती है. हम युद्ध के भी आदी हो जाते हैं. लेकिन ब्राजील ने फुटबाल की आदत डाली. उसने जमीनी स्तर पर फुटबाल खेलने, इसे बढाने के मानक गढे और देखते ही देखते वह उस खेल का सिरमौर बन गया जो उसे एक स्काटिश नागरिक ने सिखाया था. ब्राजील में बच्चे फुटबाल सीखते नहीं हैं यह तो उनके खून में, संस्कारों में प्रीलोडेड होती है. अब तक हुए उन्नीस में से पांच विश्व कप ब्राजील ने जीते हैं. उसने अब तक हुए हर विश्व कप के लिए क्वालीफाइ किया है. ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला वह दुनिया का एक मात्र देश है.

निसंदेह फुटबाल खेल नहीं एक भावना है. यह दुनिया का ब्राजील को दिया गया सबसे नायाब तोहफा है. जिसे उतने ही आदर सहेज संजोकर रखा है. यूं ही फुटबाल  हमारी इस दुनिया को कसकर साथ में बांधने वाली एक मजबूत डोर नहीं है. याद है ना साल 1970 की वह बात जब पेले ने नाइजीरिया में प्रदर्शनी मैच खेलने की हामी भरी. नाइजीरिया, जो उस समय गृहयु़द्ध से जूझ रहा था. पेले और फुटबाल के प्रति दीवानगी देखिए कि सैनिक और विद्रोही, दोनों पक्ष दो दिन के लिए युद्धविराम पर राजी हो गए ताकि सैनिक आराम से पेले को अपनी सरजमीं पर खेलते हुए देख सकें. जिन लड़ाइयों को तमाम कूटनीतियां और चालबाजियां नहीं रोक पाईं उसे इस खेल ने कर दिखाया. कितने और खेलों में इस तरह का दम है?

ओशो ने खेलों की एक खास खूबसूरती की ओर हमारा ध्यान आकर्षित किया था. कि खेल हमें सिखाते हैं कि हार या जीत मायने नहीं रखती. मायने रखता है बढिया खेलना, समग्रता से खेलना और अपनी सारी उर्जा से खेलना. दूसरे भी जीतेंगे लेकिन इसमें कुढने की जरूरत नहीं हम उन्हें भी बधाई दे सकते हैं और उनकी जीत का उत्सव मना सकते हैं. फुटबाल ऐसा ही उत्सव है. यह खेल प्रेमियों का उत्सव और ब्राजील की बेटी है. ***

 

ओह स्पेन: हालेंड ने चार साल पहले जोहानिसबर्ग की हार के भूत को सल्वाडोर में अपने पहले ही मैच में एक के बदले पांच गोल, जमीन के नीचे दबा दिया. गत विश्व विजेता स्पेन की बुढाती टीम अब तक की इस सबसे करारी पराजय की टीस से नहीं उबर पाई दूसरी हार के साथ खिताबी दौड़ से बाहर हो गयी. खैर, दो बार के यूरो और एक बार के इस विश्व चैंपियन ने एक पीढी को फुटबाल के साथ जीने के सपने दिए और शायद यह साल उसके युग के अवसान का है. बाकी, तय रहा कि इस बार चैंपियन नया होगा. ***

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