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धूप के साथ खिल जाती है.
हमारे आंगन की नरम बालू,
सुस्‍ताता मेमना और बच्‍चों का घरौंदा है
जिंदगी!

सरसों की क्यारियों में पनपी मुहब्बत की कहानियां गन्ने के खेतों में आकर खत्म नहीं होती. वक्त की लाल डायरी के 34वें पन्ने पर यह नोट लिखते वक्त उसके मन में संशय की कौनसी खरपतवार उग रही थी, पता नहीं. लेकिन मैं यह जरूर बताना चाहता हूं कि एडेले के एलबम ने डिजिटल बिक्री का नया रिकार्ड बनाया है. किस्सागो के रूप में मुहब्बत मेरे बस की बात होती तो मैं लिखता कि Sometimes it lasts in love but sometimes it hurts instead. 

खैर, मुहब्बत की मुहर बनाने वाले कारीगर, स्याही की तलाश में गए हैं. शायद इसलिए कुहरे से भरी समाचारों की दुनिया से दूर गांव में सरसों खिलखिला रही है और गेहूं ने अभी अभी कान निकाले हैं. गन्ने के मीठे खेत भले ही कम हो गए हों लेकिन लोगों के दिल में कसक तो है कि एक आध बीघा बीज लेते. सरसों के साग में डालने के लिए बथुआ, कढी के लिए कच्चा लहसुन व गूंदळी, सलाद में गाजर—मूली, मीठे में ताजा गुड़, फलों में किन्नू व मालटा.. कड़ाके की ठंड के बावजूद हमें इस मौसम में अपने घर गांव में क्यूं नहीं होना चाहिए, बताओ तो!  

ऐसे ही दिनों में जब धूप मूंगफली के छिलकों सी आंगन में बिखरी रहती है और आंगन में बाहर वाले चूल्हे पर हाथ तापती सर्दी आपको बताती है कि मावठ की बारिश नहीं हुई इसलिए ठंड सूखी है. छोटे भाई को राड़ (लड़ाई) से बाड़ अच्छी, की सीख देते हुए सच में लगता है कि मुहब्बत की फसलों को सर्दी की पहली बारिश का बेसब्री से इंतजार है. वक्त के सांचे में सारी ईंटें एक नंबर की नहीं होती, उसके भट्ठे से खोरे, तीन नंबर की ईंटे ही ज्यादा निकलती हैं. जिंदगी में उन्हीं से काम चलाने का हुनर आना चाहिए.

तो, लौटकर देखता हूं कि साल की दीवार का कैलेंडर बदल गया और एक नयी सरकार ने दिन गिनने शुरू किए हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि एक क्रांति करवट ले रही है. बेटी के टचस्क्रीन में फ्रूट नींजा डाउनलोड करते हुए हमारे सबसे बड़े विशेषज्ञ समय की रहस्यमयी चुप्पी के बारे में सोचता हूं! अमेरिका में जमी बर्फ पिघल जाएगी तब तक एक बात कहता हूं-

बिजलियां रोज गिरती नहीं बेवजह
इस चमन में  कोई तो गुनहगार होगा.
………
[हैप्पी न्यू ईयर, इस जनवरी में हमारी यह कांकड़ पांच साल की हो गई. चीयर्स एंड थैंक्स! इस बीच अपने दो प्यारे और दमदार लेखकों (किशोर चौधरीसंजय व्यास) की किताब की प्री बुकिंग भी शुरू हो गई है. लिंक यहां है, मेरी तरफ से नये साल का तोहफा मानकर बुक करिए, हमारे समय की भाषा, बोली और लेखनी पर गर्व तो हमें करना ही चाहिए! शे’र साभार]