Horizon of Hope - 48x96

स्‍याह अंधेरी रजाइयों में दुबके टीले सन्‍नाटों के जाले बुनते हैं और रेत का समंदर तूफानों के सपने देखता है. मिंगसर (मार्गशीर्ष) की ठंडाती, लंबी रातें दिनों की खुसर फुसर कर गहराती रहती हैं. हमारा एसयूवी राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 15 पर दौड़ रहा था. रेतीले थार में अंधेरे को चीरता हुआ. थार के राजमार्ग, जहां हर वाहन अपनी रोशनी खुद लेकर चलता है. अंधेर पख(वाड़ा) होने के कारण रात कुछ ज्‍यादा ही अंधेरी लगती है और शीशे के बाहर कुछ नहीं दिखता.

शायद मूंगफली के खेत रहे होंगे. या सरसों के. तारामीरा के. कुछ तो बोया ही होगा. छोले (चने) की चटनी शाम को ही भोजन में थी. अधखुली आंखों से देखता हूं, सज्‍जे हाथ की ओर बीकानेर पीछे छूट रहा है. थार के गांव कस्‍बे अब भी रात में तानकर सोते हैं और जेठ आषाढ में तो दुपहरियों में भी उंघते नजर आते हैं. यही रस्‍ता नोखा, नागौर होते हुए थार को पार कर अरावली पर्वतमाला तक पहुंचाता है.

अकेले होते ही अंधेरा शातिर हो जाता है. गहराने लगता है और ईमेल के इनबाक्‍स में पड़े खेदपत्र को जहन पटल पर रख देता है. आवेदन से खेदपत्र के बीच का दौर अद्भुत सपनों भरा होता है जब हम देखते हैं कि समंदर उठकर बादलों से पानी मांगने चला गया या कि पाताल ने आसमान को सर पर उठाकर जमीन पे पटक दिया. लेकिन खेदपत्र आने के बाद अचानक सारी चीजें फिर जमीन पर आ जाती हैं.

यह यात्राओं की खूबी है कि वे विफलताओं की धूल को उड़ाती रहती हैं और हम किसी अगले सफर की तैयारी में पिछली सारी विफलताओं पर शोक सभाओं को मुल‍तवी कर आगे बढते जाते हैं. इधर के सालों में अगर डिप्रेशन बढा है तो इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि हमने सफर करना छोड़ दिया. किसी ने कहा था कि यात्राएं हमें बाहर ही नहीं ले जाती, वे हमें अपने भीतर के उस स्‍पेस में भी ले जाती है जहां जाने से हम प्राय: कतराते रहते हैं. यात्राएं करनी चाहिएं.

देशनोक के आसपास रोशनी में खेतों में मोडी (काट छांट दी गई) खेजड़ियां दिखती हैं. सीधी और लंबी जड़ वाली खेजड़ी भी थार की अद्भुत देन है जिसकी जड़ से लेकर छोडे (छिलके), लकड़ी, पत्तियां और फळी तक काम आती है. इस मौसम में खेजड़ियों को कांट छांट दिया जाता है ताकि आने वाली गर्मियों से पहले वे फल फूलकर तैयार हो सकें. अपन भी आंखों की कोरों से निकालकर खेदपत्र के छींटों को मोडी खेजड़ियों की ओर उछाल देते हैं…. कि उम्‍मीदों की नयी कोंपले खिलेंगी.

सूरज बाबा के आने से पहले हम सूर्यनगरी में थे. एसयूवी से 500 किलोमीटर की दूरी सिर्फ चार घंटे में पूरी कर.

(Painting curtsy net- Horizon of hope by Laura Harris)