कान्‍या मान्‍यां कुर्रर, चाळां जोधपुर

जोधपुर म्‍हे उड़े कबूतर, बोले फुर फुर्रर

किसी शहर के लिए इससे बचपना सम्‍मोहन क्‍या हो सकता है? जो शहर दादी की लोरियों में बोलता था उसे अब बेटी मेरे कान में गाती है. परदेसी शहरों का सम्‍मोहन हमारे लोकगीतों में महकता है, विरहणियों ने उनके लिए उलाहनें गाए तो बच्‍चों के लिए कल्‍पनाओं का संसार रचा गया. प्रेमिकाओं के लिए वे मनपसंद चूड़ी, चूंदड़, परांदे की मांग करने का मौका थे. थार के गीतों-लोकगीतों में दिल्‍ली, मुंबई उतना नहीं आता जितना जोधपुर, जैपुर, बीकानेर या उदयपुर.

यह अलग बात है कि हाल ही के वर्षों में चीजों के आनलाइन होने बहुत से सम्‍मोहन टूट गए हैं. शहरों, स्‍थानों की कल्‍पनाओं के पखेरू अब उस शिद्दत से हमारे जीवन, भाषा व बातों में नहीं आते.

फिर भी, जोधपुर थार के लगभग हर बच्‍चे में कुछ इस तरह बड़ा हुआ कि वहां पता नहीं कितने कबूतर और मोटर होंगी. इस बार जब ट्रेन ने शहर की कांकड़ में प्रवेश किया तो मानों वह बस आंखें मलता हुआ यूं देख रहा था कि यह कौन आया है. यह थार की सूर्य नगरी है. इस शहर में उगते सूरज के साथ प्रवेश करना अलग ही अनुभव है. जब आथूणी यानी उत्‍तर की ओर से चलने वाली ठंडी हवा आपका स्‍वागत करती है. जोधपुर और लगभग पूरे मारवाड़ की यह खासियत है कि जेठ आषाढ में दिन ढलते ही ठंडी हवा बहने लगती है और दिन में तपे पहाड़ों की सारी तपन दूर कर देती है.

राजे रजवाड़ों का यह शहर आधुनिक बदलावों से कदमताल करने की कोशिश कर रहा है. मेहरानगढ़ से नीचे देखें तो लगता है कि घरों को किसी ने नीले रंग की बुशर्ट पहना दी और वे स्‍कूल जाने की तैयारी कर रहे हों. थड़े और बड़े यहां की खासियत है. चाय की थडियां जहां स्‍टूल, मुड्डों पर बैठकर अड्डेबाजी की जा सकती है और मिर्च के बड़े जो राजस्‍थान के असली टेस्‍ट से अवगत कराते हैं. थार का जीवन जीतना सरल दिखता है लोग उतने ही तीखे व मीठे होते हैं. यह उनके खान पान में नजर आता है. यही कारण है कि सबसे ज्‍यादा देसी घी, मीठा और तीखा खाने वाले इस प्रदेश जहां के रसगुल्‍ले और भुजिया दोनों समान रूप से सराहे जाते हैं.

थड़ों और बड़ों के अस्तित्‍व को मित्र लोग यहां रवायतों के अस्तित्‍व से भी जोड़कर देखते हैं. शायद यह देश के उन चुनिंदा शहरों में होगा जहां आज भी संयुक्‍त परिवार हैं. कई पीढियां साथ साथ रह रही हैं. लोग एकलखोर (अकेले रहने के आदी) नहीं हुए हैं. लोगों के पास दोस्‍तों के साथ थड़ों पर बैठकर चाय की चुस्कियां लेने का समय है. नाश्‍ते में साथ बैठकर मिर्च बड़े का आनंद ले सकते हैं. भले ही यहां आईटी कंपनी महिंद्रा सत्‍यम का कार्यालय हो, बेंगलूर को सीधी ट्रेन हो, आईआईटी हो, देश के सबसे विधि विश्‍वविद्यालयों में से एक एनएलयू हो.. लोग आज भी जयपुर जैसे किसी भी दूसरे शहर से अधिक जमीन से जुड़े हैं. जड़ों वाले हैं. यही इस जोधपुर का सम्‍मोहन है. जान बर्गर ने कहा था कि हर शहर की एक उम्र और स्‍वभाव होता है. जोधपुर एक धीर गंभीर पुरूष सा सम्‍मोहक है. ये बड़ों का शहर है जिनके पास हमें सिखाने/बताने के लिए बहुत कुछ है.

“Every city has a sex and an age which have nothing to do with demography.Romeis feminine. So isOdessa.Londonis a teenager, an urchin, and, in this, hasn’t changed since the time of Dickens.Paris, I believe, is a man in his twenties in love with an older woman.”- John berger