कुहरा जब घना होता है तो रो‍शनियां भी रंग बदल लेती हैं. कुहरे के टिड्डी दल ने धूप के खेतों को लगभग साफ कर दिया है और धूप के बचे खुचे पौधे ओस से गीले कपड़ों को सुखाने डरते-डरते आसमान की बालकनी में आते हैं.

कुहरा जब घना होता है तो रो‍शनियां भी रंग बदल लेती हैं. बिल्डिंग में अपनी पसंसीदा जगह बालकनी की सीढियों पर बैठकर कुहरे को उतरते हुए देखता हूं जो वहां पसरे अंधेरे के साथ डेडली कंबीनेशन बुनता है. कभी-कभी लगता है कि धूप के पेड़ों के खिलाफ अमरबेली षडयंत्र रचा जा रहा है. ऐसे में रोशनी के बेबस नुमाइंदे लट्टू, टयूबलाइटें.. हाथ बांधे खंबों से लटके, दीवारों से चिपके रहते हैं. अपनी प्‍यारी रातों को ऐसा देखना..? थार की तीखी दुपहरियों व मोहक चांदनी रातों में जीने वाला किस शिद्दत से बड़े दिनों का इंतजार करता है, आप समझ सकते हैं!

भीतर साल अपनी दुकान बढार रहा है. साल का मामला कुछ कुछ किसी न्‍यूज एजेंसी के न्‍यूज टिकर सा है जिस पर चौबीसों घंटें घटनाएं खबरों की तरह आती रहती हैं. खुशियां वन लाइनर न्‍यूज अलर्ट के रूप में तो परेशान, हैरान हताश करने वाली घटनाएं दो-दो, तीन-तीन लंबे टेक में. कई बार तो ऐसी घटनाओं की लीड और सेकंड लीड चौंका देती है. साल बीतता है और ये घटनाएं अतीत की फाइलों में लगती जाती हैं. अच्‍छी बात यही है कि अपने सिस्‍टम में ऐसी घटनाएं ज्‍यादा से ज्‍यादा हफ्ते, महीने भर ही सेव रहती हैं. इसके बाद सिस्‍टम बाइडिफाल्‍ट बैकअप क्‍लीन कर देता है और नये समाचारों के लिए जगह बन जाती है. हां, अपने पास घटना रूपी इन समाचारों में संपादन संशोधन का अधिकार, शक्ति नहीं है. इस्‍तेमाल करो तो करो नहीं तो फाइल में लग जाएंगे. तो दिन पहर महीने और साल इसी तरह फाइल में लगते रहे हैं कुछ खुश, कुछ हैरान तो कुछ परेशान करने वाली घटनाओं के साथ.. बाकी कुछ नहीं बदलता मौसमों के सिवा.

तारीखों के बजाय मौसमों में जीना इक अलग अनुभव है.

मौसमों में गर्मियां रूह को ताप देती हैं तो बारिशें नहलाती हैं, हवाएं पहनती हैं खुशबुओं के कपड़े तो सर्द रातें रजाई ओढे आती हैं. अपने कई तीज त्‍योहार मौसमों से बंधे हैं और साल भी उसके साथ साथ चलता रहता है. खैर, कई साल बाद अच्‍छे मेह से गिरती घर की दीवारों और गहराते कुहरे के बावजूद यह साल अच्‍छी निभा गया. भले ही पौ-मा की स‍र्द रातें आगे हैं लेकिन दिन बड़े होने लगे हैं और उम्‍मीदें उससे भी.

मोहसिन भोपाली ने लिखा है-

जो आने वाले हैं मौसम उन्‍हें शुमार में रख,

जो दिन गुजर गए उन्‍हें गिना नहीं करते.

|Sketch curtsy New Year’s Jive by Connie Chadwell|