आषाढ़ यानी चौमासे की शुरूआत. वर्षा ऋतु की  चार महीने-आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन. यानी  चातुर्मास. जेठ की गर्मी से तपते थार में नम नरम बूंदों की अगवानी करता है आषाढ़. आषाढ़ आम जीवन से लेकर खेतों तक के जीवन में बदलाव का एक नई शुरुआत का प्रतीक है. विद्यालय से लेकर खेत तक आषाढ़ में खुलते हैं. प्रकृति के बदलते रंग को आषाढ़ से ही देखा जा सकता है जो सावन तक जाते जाते तो नम नरम गीला हो जाता है.

आषाढ़

पकी नीमोळी,

शहतूत की कोंपलों

(और) केर के

लाल चटक फूलों पर

तिरता है आषाढ़।


खेजड़ी की पातड़ी,

शहतूत की नरम हरी पत्तियों,

(और) आक की डोडियों पर

फिरता है आषाढ़।


जेठ की दुपहरी

चौमासे की रातों,

(और) दादी की बातों पर

बूंदों सा

गिरता है आषाढ़।


गांव की गुवाड़ गलियों

ढाणी की पगडंडियों

डांगरों के छप्‍पर में,

(और) घर की मुंडेरों पर

मिलता है आषाढ़।


बारानी बाजरी,

ककड़ी और मतीरों

दूध की हांडी,

(और) पळींडे के कोरे घड़े पर

खिलता है आषाढ़।


स्‍कूल जाते बच्‍चों

बीज बोते किसानों,

मां के सपनों

बाबा के अरमानों,

(और) कल की उम्‍मीदों को

सिलता है आषाढ़।

|>आषाढ़ की यह कविता ‘थार की ढाणी’ से साभार ली गई है. थार की ढाणी का प्रकाशन भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने किया है. थार की ढाणी राजस्‍थान के लोक जीवन व संस्‍क़ति की बात करती है. इसे समझने की कोशिश है. किताब मंगवाने के लिए दिल्‍ली में 011- 24367260 या 08010241881 पर संपर्क किया जा सकता है.<|