‘थार की ढाणी’ का विमोचन

नई दिल्‍ली. राजस्‍थान की ढाणियों व लोकजीवन पर लिखी गई किताब ‘थार की ढाणी’ का विमोचन यहां विश्‍व पुस्‍तक मेले में हुआ. जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र के प्रोफेसर रामबक्ष ने इसका विमोचन किया.

पृथ्‍वी द्वारा लिखित ‘थार की ढाणी’ में राजस्‍थान की ढाणियों, वहां के लोगों व लोकसंस्‍कृति पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है. इसमें बताया गया है कि किस तरह ढाणियां राजस्‍थान के लोकजीवन का अभिन्‍न अंग हैं. इसके बहाने थार की विकटताओं तथा सौंदर्य पर भी इस पुस्‍तक के विभिन्‍न अध्‍यायों में प्रकाश डाला गया है.

प्रोफेसर रामबक्‍श ने इस किताब को थार के लोक जीवन व लोकसंस्‍कृति पर आरंभिक किताब बताया और इसी दिशा में कुछ और किताबें लिखे जाने की आवश्‍यकता जताई. उन्‍होंने कहा कि थार की लोकसंस्‍कृति पर बहुत कुछ लिखा जाना बाकी है.

पुस्‍तक थार की ढाणी का विमोचन करते प्रोफेसर रामबक्ष व प्रकाशन विभाग की अवर महानिदेशक वीणा जैन.

इस अवसर पर वरिष्‍ठ लेखक, पत्रकार राजकिशोर तथा नेहरू युवा केंद्र के उपनिदेशक भुवनेश जैन ने भी ‘लोक संस्‍कृति और वैश्‍वीकरण’ विषय पर अपने विचार रखे. साथ ही उन्‍होंने इस तरह की और किताबें लिखे जाने की बात की.

प्रकाशन विभाग के निदेशक राजेश झा ने कहा कि यह अपनी तरह की अनूठी व लीक से हटकर पुस्‍तक है. उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि पाठक इसे पसंद करेंगे.

इस किताब का प्रकाशन भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने किया है. प्रकाशन विभाग की अवर महानिदेशक वीणा जैन ने कहा कि ढाणी राजस्‍थान की सामाजिक संरचना की सबसे छोटी इकाई है और यह किताब इसी को केंद्र मानते हुए पूरे परिवेश तथा उसके बदलावों की बात करती है. उन्‍होंने कहा कि पुस्‍तक में ढाणी के बहाने राजस्‍थान के लोकजीवन की चर्चा की गई है. थार की परंपराओं और बदलावों के विभिन्‍न पहलुओं को इसमें समेटा गया है.

थार की ढाणी, प्रकाशन विभाग तथा बिक्री केंद्रों के बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर यहां भी ली जा सकती है.