नए साल में…

निराशाओं के अंधेरे में

आशाओं के लट्टू लेकर चलना

और भिड़ जाना चुनौतियों की भींत से.

दुखों के पहाड़ जब हिमालय हो जाएं

तो गलते हैं

और बहती है गंगा

जीवन के उर्वर मैदानों में

लहलहाती है जीवटता की फसलें.

या कि

समय का एंटीवायरस

डिटेक्‍ट/डिलीट कर देता है

विपदाओं की अधिकतर फाइलें

और

पहले से बेहतर चलने लगता है

जीवन का सिस्‍टम

नए साल में.

(- पृथ्‍वी )